हर सौ में से करीब पांच से दस मरीजों में ACL सर्जरी के बाद घुटना दोबारा पहले जैसा अस्थिर महसूस होने लगता है। यह आंकड़ा छोटा लगता है, लेकिन जिस मरीज के साथ ऐसा होता है, उसके लिए यह पूरी रिकवरी को शुरुआत से दोहराने जैसा होता है। ACL सर्जरी फेल होना कोई असामान्य घटना नहीं है, फिर भी ज्यादातर मरीजों को यह समझ नहीं आता कि उनके घुटने में जो हो रहा है, वह सामान्य रिकवरी का हिस्सा है या किसी गंभीर समस्या का संकेत।

ACL सर्जरी फेल होना उस स्थिति को कहा जाता है जब घुटने में लगाया गया ग्राफ्ट अपना काम ठीक से नहीं कर पाता, यानी वह घुटने को आगे की ओर खिसकने से नहीं रोक पाता। इसका परिणाम घुटने में बार बार अस्थिरता, सूजन और दर्द के रूप में सामने आता है, और कई बार दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

ACL सर्जरी फेल होने का मतलब क्या है

ACL सर्जरी फेल होने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि घुटने में दर्द रह गया। सर्जरी को फेल तब माना जाता है जब घुटने में तीन में से कोई एक या ज्यादा लक्षण साफ नजर आएं, यानी अस्थिरता, जकड़न या लगातार दर्द। कई बार मरीज को लगता है कि रिकवरी धीमी चल रही है, जबकि असल में ग्राफ्ट ठीक से जुड़ ही नहीं पाया।

यह समझना जरूरी है कि हर तकलीफ का मतलब सर्जरी का फेल होना नहीं है। पहले तीन से छह महीनों में सूजन, अकड़न और हल्का दर्द रिकवरी का सामान्य हिस्सा हैं। समस्या तब शुरू होती है जब ये लक्षण समय के साथ कम होने की बजाय बने रहते हैं या घुटना बार बार “गिवे वे” यानी अचानक ढीला पड़ जाने जैसा महसूस होता है।

ACL सर्जरी फेल होने के मुख्य कारण

ACL ग्राफ्ट फेलियर के पीछे शायद ही कभी एक अकेला कारण होता है। ज्यादातर मामलों में सर्जिकल तकनीक, मरीज का व्यवहार और शरीर की जैविक प्रतिक्रिया, तीनों मिलकर नतीजा तय करते हैं। नीचे वे कारण दिए गए हैं जिनकी वजह से क्लिनिकल भाषा में इसे ACL सर्जरी फेल होना कहा जाता है।

गलत टनल प्लेसमेंट

ग्राफ्ट को हड्डी में जिन सुरंगों के जरिए फिक्स किया जाता है, अगर वे सही जगह पर नहीं बनाई जातीं तो नया लिगामेंट प्राकृतिक ACL की तरह काम नहीं कर पाता। यह तकनीकी चूक ग्राफ्ट फेलियर के सबसे बड़े कारणों में गिनी जाती है, और इसका असर सर्जरी के महीनों बाद तक सामने नहीं आता।

ग्राफ्ट का शरीर से ठीक से न जुड़ पाना

इसे बायोलॉजिकल फेलियर कहा जाता है। कभी कभी नया टिशू शरीर की रक्त आपूर्ति से पूरी तरह नहीं जुड़ पाता, जिससे वह उतना मजबूत नहीं बन पाता जितना उसे बनना चाहिए। धूम्रपान, खराब पोषण और अनियंत्रित डायबिटीज इस प्रक्रिया को और धीमा कर सकते हैं।

जल्दी खेल या भारी गतिविधि में लौटना

ग्राफ्ट को पूरी तरह मजबूत होने में करीब नौ से बारह महीने लगते हैं। इस दौरान अगर मरीज दौड़ना, कूदना या दिशा बदलने वाले खेल जल्दी शुरू कर देता है, तो ग्राफ्ट पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है और वह खिंच सकता है या दोबारा फट सकता है।

अधूरी या गलत फिजियोथेरेपी

एक सही तरीके से की गई सर्जरी भी अधूरी रिहैबिलिटेशन के कारण फेल हो सकती है। मांसपेशियों की ताकत लौटाए बिना और संतुलन की ट्रेनिंग छोड़कर घुटना कभी उतना स्थिर नहीं हो पाता जितना उसे होना चाहिए। हमारी पोस्ट सर्जरी फिजियोथेरेपी सेवा इसी अंतर को भरने के लिए बनाई गई है।

अनदेखा रह गया दूसरा नुकसान

अगर मेनिस्कस या घुटने की उपास्थि पहले से क्षतिग्रस्त थी और सर्जरी के दौरान उस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह घुटने की स्थिरता को कमजोर करता रहता है, भले ही ACL ग्राफ्ट खुद ठीक से लगा हो।

ACL सर्जरी फेल होने के लक्षण कैसे पहचानें

ACL सर्जरी फेल होने के लक्षण अक्सर धीरे धीरे सामने आते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना उतना आसान नहीं होता जितना लगता है।

  • घुटने का बार बार “गिवे वे” होना, यानी चलते या मुड़ते समय अचानक ऐसा लगना जैसे घुटना साथ छोड़ रहा हो
  • सर्जरी के कई महीनों बाद भी घुटने में सूजन का बार बार लौटना
  • सीढ़ी उतरते या दिशा बदलते समय दर्द और असुरक्षा महसूस होना
  • घुटने को पूरी तरह सीधा करने या मोड़ने में परेशानी
  • चलते समय घुटने में क्लिक या पॉपिंग जैसी आवाज आना
  • खेल या दौड़ने जैसी गतिविधियों में लौटने पर घुटने पर भरोसा न कर पाना

अगर इनमें से दो या तीन लक्षण एक साथ बने रहें, तो यह संकेत है कि सर्जन से दोबारा जांच करवाई जानी चाहिए, चाहे सर्जरी को कितना भी समय क्यों न बीत गया हो।

डॉक्टर सर्जरी फेल हुई है या नहीं, यह कैसे पता लगाते हैं

क्लिनिकल जांच में सर्जन सबसे पहले लैकमैन टेस्ट और पिवट शिफ्ट टेस्ट करते हैं, जिनसे यह पता चलता है कि घुटने की हड्डियां जरूरत से ज्यादा आगे पीछे खिसक रही हैं या नहीं। इसके बाद MRI स्कैन से ग्राफ्ट की स्थिति, हड्डी में सूजन के निशान और आसपास के टिशू की सेहत की पुष्टि की जाती है।

अगर स्वस्थ घुटने की तुलना में ऑपरेशन किए गए घुटने में तीन मिलीमीटर से ज्यादा खिसकाव पाया जाए, तो यह माना जाता है कि ग्राफ्ट अपना काम ठीक से नहीं कर रहा।

कुछ मामलों में KT1000 जैसी स्ट्रेस मशीन या स्ट्रेस एक्स रे का इस्तेमाल भी किया जाता है ताकि खिसकाव को सटीक आंकड़ों में मापा जा सके। यह पूरी प्रक्रिया घर पर नहीं की जा सकती, इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलना ही सही रास्ता है। PubMed पर प्रकाशित एक क्लिनिकल समीक्षा में भी अस्थिरता, जकड़न और दर्द को ग्राफ्ट फेलियर पहचानने के तीन मुख्य संकेत बताया गया है।

अगर ACL सर्जरी फेल हो जाए तो आगे क्या होता है

ACL सर्जरी फेल होने का मतलब यह नहीं है कि सुधार की गुंजाइश खत्म हो गई। ऐसे मामलों में सर्जन आमतौर पर रिविजन सर्जरी की सलाह देते हैं, जिसमें पुराना ग्राफ्ट हटाकर नया ग्राफ्ट लगाया जाता है। रिविजन सर्जरी पहली सर्जरी से थोड़ी ज्यादा जटिल होती है, क्योंकि इसमें पुरानी टनल की स्थिति और हड्डी के नुकसान को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

रिकवरी का समय भी पहली सर्जरी से थोड़ा लंबा हो सकता है, लेकिन सही योजना और अनुशासित फिजियोथेरेपी के साथ ज्यादातर मरीज दोबारा सामान्य जीवन और खेल गतिविधियों में लौट पाते हैं। Mayo Clinic के अनुभव के अनुसार, रिविजन सर्जरी की सफलता काफी हद तक सही प्रीऑपरेटिव प्लानिंग पर निर्भर करती है। हर मामले में फैसला मरीज की उम्र, गतिविधि के स्तर और घुटने की समग्र स्थिति के आधार पर लिया जाता है। अगर आपको लगता है कि यह स्थिति आप पर लागू होती है, तो हमारे ACL रिविजन सर्जरी क्लिनिक से संपर्क करें।

ACL सर्जरी फेल होने से बचाव कैसे करें

क्या करेंक्या न करें
फिजियोथेरेपिस्ट के बताए हर चरण को पूरा करेंदर्द कम होते ही रिहैब बीच में न छोड़ें
डॉक्टर की मंजूरी के बाद ही खेल में लौटेंबिना क्लीयरेंस दौड़ना या कूदना शुरू न करें
घुटने के आसपास की मांसपेशियों को नियमित मजबूत करेंसिर्फ दर्द न होने को पूरी तरह ठीक होना न मान लें
प्रोटीन और विटामिन डी युक्त संतुलित आहार लेंधूम्रपान और असंतुलित खानपान को नजरअंदाज न करें

ACL सर्जरी फेल होना पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, क्योंकि इसमें सर्जिकल तकनीक जैसे कारक भी शामिल होते हैं जो मरीज के हाथ में नहीं हैं। लेकिन रिहैबिलिटेशन को पूरी गंभीरता से लेना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना, जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।