ACL Surgery कराने वाले ज्यादातर patients को सालों से सिर्फ एक graft option पता है, Hamstring tendon। लेकिन Orthopaedic research ने अब एक नया, ज्यादा solid विकल्प सामने रखा है, जो जांघ की बजाय टखने के पास से लिया जाता है। Indore में Peroneus Longus Graft से ACL Surgery अब उन patients के लिए एक भरोसेमंद option बन चुकी है जिन्हें पतले graft या जांघ की weakness को लेकर चिंता रहती है।
Peroneus Longus Graft क्या होता है?
यह पिंडली के बाहरी हिस्से में मौजूद एक tendon है, जो टखने को मोड़ने में मदद करता है। ACL Surgery में इसी tendon के एक हिस्से को निकालकर घुटने के फटे ligament की जगह लगाया जाता है। यह tendon आमतौर पर hamstring से मोटा होता है और इसे निकालने के बाद ankle की strength पर बहुत कम असर पड़ता है।
Key Takeaways:
- Peroneus Longus graft, hamstring की तुलना में ज्यादा मोटा होता है, जिससे graft की strength को लेकर surgeon को ज्यादा भरोसा रहता है
- इसे निकालने के बाद thigh की muscles पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि यह ankle के पास से लिया जाता है
- Ankle की strength और function पर long term असर बहुत limited पाया गया है, research studies में इसकी पुष्टि हुई है
- Short height वाले patients में जहां hamstring graft पतला रह जाता है, वहां यह technique खास तौर पर useful मानी जाती है
- यह technique arthroscopic ACL surgery का ही हिस्सा है, यानी छोटे incisions से की जाती है
Indore में Peroneus Longus Graft से ACL Surgery कैसे की जाती है
Surgery की शुरुआत हमेशा सही diagnosis से होती है। Lachman Test और MRI के जरिए यह पुष्टि की जाती है कि ligament कितना फटा है और Grade 3 ACL Tear जैसी गंभीर injury है या नहीं। इसके बाद surgeon तय करता है कि patient के लिए कौन सा graft सबसे suitable रहेगा।
Procedure सामान्य रूप से इन steps में पूरी होती है:
- Ankle के पास एक छोटा incision लगाकर peroneus longus tendon का हिस्सा निकाला जाता है
- Tendon को तैयार करके graft के रूप में shape दिया जाता है
- Arthroscope की मदद से घुटने के अंदर पुराना, फटा हुआ ligament हटाया जाता है
- नए graft को bone में बनाई गई tunnel से गुजारकर screw या button से fix किया जाता है
- घाव close करके patient को घुटने की शुरुआती movement और चलने की सलाह दी जाती है
पूरी procedure ACL Reconstruction Surgery के standard ढांचे में ही होती है, सिर्फ graft का source अलग होता है।
Peroneus Longus Graft बनाम Hamstring Graft
Indore में Peroneus Longus Graft से ACL Surgery कराने से पहले patients अक्सर पूछते हैं कि दोनों graft में असली फर्क क्या है। एक Comparative Study बताता है कि peroneus longus graft का diameter hamstring से बड़ा होता है और thigh की thickness पर असर भी कम रहता है।
| Aspect | Peroneus Longus Graft | Hamstring Graft |
|---|---|---|
| Graft Diameter | आमतौर पर मोटा | कभी कभी पतला, खासकर short height में |
| Harvest Location | Ankle के पास calf | Thigh के पीछे |
| Thigh पर Effect | बहुत कम | Muscle weakness हो सकती है |
| Functional Score | Hamstring के बराबर | Established और भरोसेमंद |
Peroneus Longus Graft Technique के मुख्य Fayde

यह graft हर patient के लिए जरूरी नहीं, लेकिन कुछ situations में इसका फायदा साफ नजर आता है।
- Graft की thickness ज्यादा होने से knee की stability को लेकर surgeon को ज्यादा भरोसा रहता है
- Thigh में swelling या weakness की शिकायत hamstring graft की तुलना में कम देखी जाती है
- Tendon निकालने की process अपेक्षाकृत जल्दी पूरी हो जाती है
- घुटना मोड़ने या बैठने की आदत, जो Indian lifestyle में आम है, उस पर असर limited रहता है
Surgery के बाद Recovery Timeline
Indore में Peroneus Longus Graft से ACL Surgery के बाद recovery हर patient में अलग गति से चलती है, फिर भी एक सामान्य ढांचा मददगार होता है:
- 0 से 3 हफ्ते: घाव भरना, ankle और knee की हल्की movement शुरू होती है
- 3 से 6 हफ्ते: crutches धीरे धीरे कम होती हैं, चलने की capacity बढ़ती है
- 6 हफ्ते से 3 महीने: physiotherapy के जरिए muscles की strength बनाई जाती है
- 3 से 6 महीने: surgeon की approval के बाद running शुरू करने की तैयारी होती है
- 6 महीने के बाद: sport level activities की ओर धीरे धीरे वापसी होती है, यह patient की strength पर निर्भर करता है
क्या Graft निकालने से Ankle पर कोई असर पड़ता है
यह सवाल हर patient के मन में आता है, और यह वाजिब भी है, क्योंकि ankle चलने और balance के लिए जरूरी होता है।
“Patients अक्सर पूछते हैं कि ankle से tendon निकालने पर चलने में दिक्कत तो नहीं होगी। लेकिन peroneus longus अकेला tendon नहीं है जो ankle को move कराता है, आसपास के दूसरे tendons यह काम संभाल लेते हैं, इसलिए ज्यादातर patients में ankle की function पूरी तरह बनी रहती है,” Dr. Prince Uchadiya बताते हैं।
Cleveland Clinic की जानकारी के अनुसार ACL surgery के बाद graft site की care और regular physiotherapy ही long term function तय करने वाले सबसे बड़े factor हैं, सिर्फ graft का type नहीं।
यह Graft किन Patients के लिए बेहतर Option माना जाता है
हर technique हर patient के लिए एक जैसी suitable नहीं होती। Peroneus longus graft खास तौर पर इन situations में consider किया जाता है:
- जिन patients का height कम है और जहां hamstring graft का diameter पर्याप्त नहीं मिलता
- जिन athletes को thigh की पूरी strength जल्दी वापस चाहिए, जैसे running या jumping वाले sports
- वो women जिनमें ACL injury का risk वैसे भी ज्यादा माना जाता है और graft का size अहम होता है
- Meniscus के साथ ACL injury वाले कुछ cases में भी surgeon इस option पर consider करते हैं
Surgery की तैयारी और Cost को लेकर जरूरी बातें
Surgery से पहले patient को अपनी पुरानी MRI, X ray और किसी भी पहले के knee treatment की जानकारी surgeon के साथ share करनी चाहिए। जिन patients की पहले भी knee surgery हो चुकी है, उनके लिए यह जानकारी graft चुनने में मदद करती है।
Cost को लेकर आमतौर पर पूछा जाने वाला सवाल यह भी है कि क्या peroneus longus technique hamstring से महंगी पड़ती है। ज्यादातर cases में ACL surgery का total cost graft के type से नहीं, बल्कि hospital, implant और admission के दिनों से तय होता है।
Indore में Peroneus Longus Graft से ACL Surgery कराने का फैसला अकेले technique की newness देखकर नहीं, बल्कि patient की age, activity level, height और knee की मौजूदा condition को साथ में देखकर लिया जाना चाहिए। सही graft वही है जो surgeon के experience और patient की जरूरत, दोनों से match खाए।